लोकपाल की लोक कबिता

तू मन विच डर ना रक्,
सारे जग को चक देंगे, आया मैं गड्डी मोड़ के... ;)

एक हसीना थी. बाकि सब क्या परियों के रानी थे?
परियों की रानी दुक से बेगानी लग जाये न धुप तुझे
उड़ उड़ जाऊं लोकपाल बनाऊं
धुप लगी है छाँओ तुझे
गीत गाए अन्ना, बौखलाए सर्कार
है अरुणा दीवानी, अरुंधती गाए म-ल-हा-र
क्या मौसम आया है.....
एक दो तिन
सर्कार के उड़ गए हैं नींद रात दिन
आए अन्ना
अन्ना कहा अन्ना कहा अन्ना कहा सर्कार बेईमान
आती नहीं भला बुरा पहचान

अन्ना अन्ना ए अन्ना अन्ना को आने दे
सर्कार को जाने दे, सुबह को पिटती है
घर से खींच के लेती है
अनसन से डरके हमें रूलबुक दिक्लाती है
सर्कार की इज्लाश में सर को अन्ना पिट ता है
सर्कार कोई मामूली, कानून की पेटी है?

तू रु रु तू रु रु तू रु रु तू रु
कैसे करूँ अनसन में सुरु?
कोई जगह न खाली, सर्कार की रसी और गाली
तू ही बता मैं क्या करूँ ऊँ ऊँ ऊँ

रात भर अन्ना से सर्कार टकराएगा
जब नशा आयेगा बड़ा मजा आयेगा
तू न जा मेरे सर्कार अन्ना को यूँ घेर के
तू न जा मेरे सर्कार अन्ना को यूँ घेर के
एक वादे के लिए, एक वादा तोड़ के
अन्ना वापस आयेगा उसने ये वादा किया
एक वादे के लिए
तू न जा मेरे सर्कार अन्ना को यूँ घेर के

पत्थर के सर्कार
अन्ना ने तुझे अनसन का खुदा माना
ये भूल हुई अन्ना से जो तुझे अनसन का खुदा माना

अन्ना है बेचैन, बेकरार है
ओ ओ ओ ओ
सर्कार के व अक्तियर है
ओ ओ ओ ओ
संभालो संभालो उसे प्यार है
ओ ओ ओ ओ
Dolores Fung I don't know what it means, but looks very artistic ;)
Manmohan Dash: it's some musical thoughts written in Hindi. it mimics the popular Hindi movie musicals..

आना पड़ेगा तुमको अन्ना हजारे,
लेना पड़ेगा तुझे सर्कार के मार,
देना पड़ेगा उनको मुगलाई गोश्त
और जाना पड़ेगा तुमको खाके आचार

अन्ना... अन्ना ..अन्ना..
मैं जब जब तुझको पुकारूँ
तुझे लगता है मैं हूँ बीमारू
मैं सोया नहीं रात भर ऐसे
तुझे लगता है सर्कार कैसे?
मेरे भोले सिपाही
तुने दिल दे दिया
सर्कार का नींद खो गया

अन्ना यहाँ
सर्कार भी यहाँ
इसके सिबाय
जाना कहाँ
जी चाहे जब अन्ना को आवाज़ दे
अन्ना आयेगा फौज लेके
अन्ना यहाँ
सर्कार भी यहाँ
सब के दिलों में गुस्ताखियाँ

अन्ना की निकली सवारी
अन्ना है सर्कार से प्यारी
एक तरफ अन्ना एक तरफ अरबिंद
दोनों है सर्कार से हारी
.......अन्ना हैं बिष्णु के अवतारी

अपुन बोला
अन्ना मेरे लाला
अपुन जब भी फ़ोन करता
ऐ अन्ना बीजी काहेको मांगता रे?
ये उसका स्टाइल होएंगा
ओठों पे सर्कार दिल पे तवाही होएंगा
मैंने उसे बताया
ऐ अन्ना "एक काम कर सरकर को बुला...खाली पिली धो डाल, ससुरा कम्बखत सर्कार अपनी मटर-गश्ती कर रही है"

जींदगी के सफ़र में जो लोग फिसल जाते हैं
व अन्ना के तरह धो सकते हैं
अपनी पागलपन की एहसास दूसरों को होनी चाहिए
खुदकशी में किस्मत की पुकार भी भेंस की आवाज़ लगती है

iska koi matlab mat nikalo
सुन ससुरा
मैं हूँ किस्मत और बदकिस्मती की एक अनोखा पशेरा
अन्ना और स्वतंत्रता की आवाज़ में दब गयी है मेरी खुद की कशमकश
जींदगी खुशहाली लगती है पर बंध जाना चाहता हूँ फिर से एक सूरज के तरह
जो खुद घुमती नहीं पर घुमने की एह्शाश देती है, कभी जलती है और कभी घटाओं के पीछे मुस्कुराती है
कभी दिन को खींचती है और कभी मौसम को गुमराह करती है

Leave a Reply

Please log in using one of these methods to post your comment:

WordPress.com Logo

You are commenting using your WordPress.com account. Log Out /  Change )

Google+ photo

You are commenting using your Google+ account. Log Out /  Change )

Twitter picture

You are commenting using your Twitter account. Log Out /  Change )

Facebook photo

You are commenting using your Facebook account. Log Out /  Change )

Connecting to %s