poem

तु जो देखे आंसमाँ में तुझे तारे दिखेंगे

A poem ..

सुन मधुबाला
तु जो देखे आंसमाँ में तुझे तारे दिखेंगे
तु जो सोचे तो ये सब आशिक सारे लगेंगे
love sweet sweet love blue night and close to you
तुझे चाहे जो पल वो आज है तेरे पास
तेरी परछाई और तेरी ये सपने
love sweet sweet love blue night and just for you

तु जो देखे आंसमाँ में तुझे तारे दिखेंगे

A poem ..

सुन मधुबाला
तु जो देखे आंसमाँ में तुझे तारे दिखेंगे
तु जो सोचे तो ये सब आशिक सारे लगेंगे
love sweet sweet love blue night and close to you
तुझे चाहे जो पल वो आज है तेरे पास
तेरी परछाई और तेरी ये सपने
love sweet sweet love blue night and just for you

हुस्न ने तुझे सिर्फ ऐतला किया है

हुस्न किसीको घायल नहीं करती
हुस्न की याद में जख्म नींद में रेहती है
होश तो यूँ ही आती जाती है
हुस्न के नाम पर इसे बदनाम क्यों किया जाता

तू हस भी सकता है अपने ही मैनत में
हुस्न ने तुझे सिर्फ ऐतला किया है

मजहब का इश्क में क्या पेहचान
इश्क तो अच्छों को डूबा सकता है
बोलने की अंदाज पे मत जा
यहाँ दो चार क़त्ल भी हो सकते हैं

ख्वाबों के आंगन, ख्वाबों के परछाईआं

सपने टूटगए शीशे के तरह …

जो शीशा टूट सक्ती है तो सपने क्यों नहीं ?

टूट के बिखर गए …

— ख्वाबों के आंगन में,

— बटोरने की फुर्सत न मिली !

जीने के वसूलों को …

सपनो से मुकम्मल करना …

— वह भी एक सपना !

ख्वाबों के परछाईआं …

अभी भी मेरे पीछे हैं …